February 27, 2026

कोविड-19 की वैक्सीन बीमारी से होने वाली मृत्यु को रोकने में शत प्रतिशत प्रभावीः डॉ. श्रीवास्तव

45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग लगवाएं टीका

कोरबा 16 अप्रैल। कोरोना वायरस का टीका किडनी, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग से संबंधित विभिन्न प्रकार के बीमारी के मरीजों के लिए भी सुरक्षित हैं। 45 वर्ष और इससे अधिक उम्र के सभी लोगों को कोविड वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए। कोविड टीका के बारे में किसी भी प्रकार की भ्रांतियों को ध्यान में न रखते हुए सभी पात्र लोगों को कोविड टीका लगाना चाहिए।

कोरोना वायरस का लगभग 90 प्रतिशत संक्रमण वर्तमान में 45 वर्ष और इससे अधिक आयु वर्ग के लोगों में हो रहा हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और दूसरे लोगों में फैलने से बचाने के लिए 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को टीका अवश्य लगाना चाहिए। कार्डियोलाजी एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट मेडिकल कालेज रायपुर के विभागाध्यक्ष डा स्मित श्रीवास्तव के अनुसार कोविड 19 की वैक्सीन इस बीमारी से होने वाली मृत्यु को रोकने में शत प्रतिशत प्रभावी है। इसे लगाने के बाद यदि व्यक्ति को संक्रमण होता है तो भी वह गंभीर प्रकार का नही होगा। उन्होने कहा कि उच्च जोखिम वाले समूह यानि 45 वर्ष से अधिक आयु की आबादी का टीकाकरण करने से मृत्यु दर में बहुत कमी हो जाएगी। डा श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड संक्रमण वाले लोगों को ठीक होने के आठ से 12 सप्ताह के बाद टीका लगवाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने कोविड.19 संक्रमण के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी प्राप्त की है तो उसे टीका लेने से पहले आठ से 12 सप्ताह तक इंतजार करना चाहिए। उच्च रक्तचापए मधुमेहए गुर्दे की बीमारी और हृदय रोगए बाईपासए पोस्ट.एंजियोग्राफी और डायलिसिस के रोगियों में भी वैक्सीन सुरक्षित है। ब्लड थिनर जैसे वार्फरिन या नए एंटी.कोअगुलेशन एजेंट्स लेने वाले मरीजों के इजेक्शन साइट पर सूजन का एक छोटा जोखिम होता है। जो रोगी इन नए दवाईयों से इलाज करवा रहे हैं वे अपनी सुबह की खुराक को छोड़ सकते हैं तथा टीका लगवा कर अगली नियमित खुराक जारी रख सकते हैं। कोविड टीका के बारे में यह बातें पूरी तरह से भ्रामक है तथा इसका कोई वैज्ञानिक तथ्य नही है। स्ट्रोकए पार्किंसंस डिजीजए डिमेंशिया जैसी मानसिक बीमारी वाले मरीजों को वैक्सीन लेना चाहिए क्योंकि यह उनके लिए सुरक्षित है। किसी भी प्रकार के इम्युनोसप्रेसेन्ट यानी अंग प्रत्यारोपण से गुजरने वाले मरीज सुरक्षित रूप से वैक्सीन ले सकते हैं। हालांकिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पूरी नहीं हो सकती है। नामांकन करने से पहले अपने चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। उन्होने कहा कि यह टीका नपुंसकता का कारण नही बनता है और न हीे किसी वैक्सीन से किसी व्यक्ति का डीएनए बदल सकता है।

डा श्रीवास्तव ने बताया कि कैंसर वाले और कीमोथेरेपी से गुजरने वाले मरीजों को अपने डाक्टर से परामर्श करना चाहिए और कीमोथेरेपी चक्रों के बीच टीकाकरण के लिए एक उपयुक्त समय की तलाश करनी चाहिए। आदर्श रूप से रोगी को टीके लेने के लिए कम से कम चार सप्ताह बाद कीमोथेरेपी का इंतजार करना चाहिए। टीकाकरण के बाद बुखार, शरीर में दर्द, चक्कर आना, सिरदर्द सामान्य लक्षण हैं। यदि आवश्यक हो तो पैरासिटामोल दवाई को टीकाकरण के बाद लिया जा सकता है और अधिकांश लक्षणों को अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।

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Ranjan Prasad

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