ब्लास्टिंग से नराईबोध के ग्रामीणों में दहशत, विस्थापन, रोजगार व सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी


कोरबा। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने खदान में हो रही भारी ब्लास्टिंग से जान-माल को खतरा बढ़ने का आरोप लगाते हुए विस्थापन, रोजगार, मुआवजा और सुरक्षा संबंधी मांगों को लेकर प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग से पूरा गांव दहल उठता है और लोग भय के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।


ग्रामीणों के अनुसार ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाले पत्थरों से कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। हाल ही में एक घर की एस्बेस्टस शीट तोड़कर बड़ा पत्थर कमरे के भीतर गिर गया, जहां परिवार के सदस्य मौजूद थे। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उनका यह भी आरोप है कि लगातार ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र के कुछ बोरवेल और कुओं पर भी असर पड़ा है, जिससे पेयजल संकट गहराने लगा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी मिलने पर एसईसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त मकान की मरम्मत तथा नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता जान-माल की सुरक्षा है। उनका कहना है कि केवल नुकसान की भरपाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। रोजगार और विस्थापन के मुद्दे पर भी ग्रामीणों ने प्रबंधन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार रोजगार नहीं मिल रहा है तथा विस्थापन की प्रक्रिया भी लंबे समय से अधूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और एसईसीएल प्रबंधन के साथ बैठकें होने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा, विस्थापन, रोजगार और मुआवजे से जुड़ी उनकी मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो वे एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का घेराव कर व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

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Ranjan Prasad

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