कांग्रेस शासन में कोई पुनर्वास नहीं, नकटी में साय सरकार ने दिखाई संवेदनशीलता
रायपुर। कांग्रेस शासनकाल में सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास या विस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जबकि भाजपा सरकार ने नकटी प्रकरण में प्रभावितों को उचित पुनर्वास प्रदान करके अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदार प्रशासन का परिचय दिया है। यह तथ्य ग्राम सेरीखेड़ी (रायपुर) के अतिक्रमण प्रकरण के दस्तावेजों से स्पष्ट होता है।
दस्तावेज के अनुसार, ग्राम सेरीखेड़ी, तहसील एवं जिला रायपुर में शासकीय भूमि (खसरा नंबर 682, रकबा 12.128 हेक्टेयर) पर 148 अतिक्रमण थे, जिनमें लगभग 100 मकान भी शामिल थे। कांग्रेस शासन के दौरान वर्ष 2018 से ही इसकी प्रक्रिया शुरू हुई।
- 04/09/2018 को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 250 के तहत नायब तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू की गई।
- 22/11/2021 को प्रकरण दर्ज किया गया।
- 07/01/2022 को बेदखली वारंट जारी हुआ।
- 07/11/2022 को 148 अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्यवाही कर 22/02/2023 को नस्तीबद्ध किया गया।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दस्तावेज के पांचवें बिंदु में स्पष्ट रूप से लिखा है: “अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पश्चात् अतिक्रमकों के व्यवस्थापन या पुनर्वास संबंधी कोई कार्यवाही नहीं की गई।”
अर्थात् कांग्रेस सरकार ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए न कोई मुआवजा दिया, न वैकल्पिक भूमि, न कोई पुनर्वास योजना। यह कांग्रेस शासन की लापरवाही और जन-विरोधी नीति का स्पष्ट उदाहरण है, जहां अतिक्रमण हटाने को सिर्फ दिखावा बनाकर रखा गया और गरीब-मजदूर परिवारों की दुर्दशा की कोई परवाह नहीं की गई।
भाजपा सरकार की तारीफ: इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने नकटी प्रकरण में अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास की जिम्मेदारी ली। भाजपा सरकार का यह रुख विकास और न्याय दोनों को साथ लेकर चलने का प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार गरीबों के हितों की रक्षा करते हुए अवैध कब्जों को हटाने की कार्यवाही कर रही है, लेकिन किसी को बिना सहारे नहीं छोड़ रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस शासन में “अतिक्रमण हटाओ, लेकिन लोगों को बर्बाद मत करो” वाली नीति पूरी तरह गायब थी। सेरीखेड़ी प्रकरण इसके जीवंत प्रमाण है। वहीं भाजपा सरकार ने न सिर्फ भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया, बल्कि प्रभावितों के पुनर्वास का भी ध्यान रखा, जो एक जिम्मेदार और संवेदनशील सरकार की पहचान है.
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है, लेकिन अतिक्रमण हटाने के बाद प्रभावित परिवारों को सड़क पर नहीं छोड़ना चाहिए। कांग्रेस ने सेरीखेड़ी में जो लापरवाही दिखाई, भाजपा सरकार ने नकटी मामले में उसकी भरपाई करते हुए सही मिसाल पेश की है। जनता अब ऐसे प्रशासन की अपेक्षा रखती है जो विकास के साथ-साथ न्याय और संवेदनशीलता भी दिखाए।