मार्गशीर्ष माह में आहार-विहार पर दें ध्यान : नाड़ीवैद्य डॉ. शर्मा

कोरबा। हिंदी पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष (अगहन) माह का आरंभ 6 नवंबर गुरुवार से हो गया है, जो 4 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान मौसम में ठंडक बढ़ जाती है और शरीर में कफ तथा वात दोष का प्रकोप होता है। छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेदाचार्य नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि इस माह में लोगों को अपने खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मार्गशीर्ष माह में स्निग्ध, पौष्टिक, अम्ल व लवण रस युक्त भोजन का सेवन करना लाभदायक होता है, जबकि अतिशीत, कटु, तिक्त और कषाय रस वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
डॉ. शर्मा के अनुसार इस अवधि में जीरे का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। वहीं वसायुक्त भोजन, शहद, च्यवनप्राश, अश्वगंधा, आंवला और शतावर का सेवन शरीर को शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मार्गशीर्ष माह शक्ति संचय का समय है, इसलिए ऋतु के अनुसार आहार-विहार अपनाकर वर्षभर स्वस्थ रहा जा सकता है।