ग्रामीणों को मिल रहा है हाथियों के रियल टाइम मूवमेंट का अलर्ट

0 एलीफैंट ट्रैकर्स बना ग्रामीणों का मददगार
कोरबा। हाथियों से होने वाले नुकसान को रोकने की कवायद की जा रही है। इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाथियों के लोकेशन को लेकर ग्रामीणों को अलर्ट किया जा रहा है। खास बात यह है कि ऐप की मदद से मोबाइल पर डिजिटल अलर्ट ग्रामीणों को मिल रही है।
कोरबा हाथी प्रभाव जिला है, जहां अक्सर हाथियों के झुंड विचरण करते नजर आ जाते हैं। हाथियों के मूवमेंट की सही जानकारी न होने के कारण कई बार दुर्घटना घट चुकी है। अब जिले में हाथी मानव द्वंद में कमी आ रही है इसका कारण है 10 किलोमीटर के इलाके में हाथियों के रियल टाईम मूवमेंट का अलर्ट ग्रामीणों के मोबाइल पर भेजा रहा है। इस एप में ग्रामीणों के मोबाइल नंबर और जीपीएस लोकेशन का पंजीयन किया गया है। जब एलीफैंट ट्रैकर्स द्वारा हाथियों के मूवमेंट का इनपुट एप पर दर्ज किया जाता है, तो एप द्वारा स्वचालित रूप से ग्रामीणों के मोबाइल पर अलर्ट जाता है। हाथी प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए वन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) और वन्यजीव विंग द्वारा संयुक्त रूप से इस एप को प्राप्त इनपुट के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई पर काम करता है। इस एप का उद्देश्य हाथी ट्रैकर्स द्वारा की जाने वाली मुनादी के अलावा प्रभावित गांव के प्रत्येक व्यक्ति को मोबाइल पर कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप अलर्ट के भेजकर हाथियों की उपस्थिति के बारे में सूचना पहुंचाना है।
0 हाथी के अलावा भालू की उपस्थिति का भी अलर्ट
अलर्ट एवं ट्रैकिंग एप द्वारा समय अवधि फिल्टर का उपयोग करके हाथी मार्ग को ट्रैक कर, हाथियों के झुंड को फिल्टर किया जा सकता है। अलग-अलग मार्गों को ट्रैक किया जा सकता है। इस एप का केवल हाथी ही नहीं, भालू की उपिस्थति का भी अलर्ट भेजने, अनुसंधान हेतु, आवास विकास, आवश्यकता के अनुसार योजना बनाने, ट्रैक करने में उपयोग किया जा सकता है।
0 इस तरह करता है काम
हाथी मित्र दल के सदस्य हाथियों के स्थान, झुंड के नाम, व्यवहार और अन्य विशेषताओं को फीड करने के लिए ओपन सोर्स का उपयोग करते हैं। यह एप ऑनलाइन मोड (रियल टाइम) और ऑफलाइन मोड हैं) दोनों में काम करता है।