जहर सेवन नहीं,शराब विथड्रॉअल से बिगड़ी किसान की तबीयत, धान के कारण आत्महत्या का प्रयास का दावा खारिज
0 प्रशासनिक जांच में सामने लाए गए तथ्य

कोरबा। कोरबा जिले के ग्राम कोरबी हरदी बाजार निवासी किसान के द्वारा धान बिक्री में आ रही समस्या को लेकर जहर सेवन कर लेने के मामले को लेकर मची राजनीतिक और प्रशासनिक हाय-तौबा के बीच स्पष्ट हुआ है कि मामला जहर का नहीं बल्कि शराब सेवन के बाद के असर का है।
स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के डीन डॉ. के. के. सहारे ने स्पष्ट किया है कि सुमेर सिंह (50 वर्ष), निवासी ग्राम पूटा, तहसील हरदीबाजार को जहर सेवन की शिकायत के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के आईसीयू में भर्ती किया गया था। प्रारंभिक परीक्षण एवं उपचार के दौरान यह पाया गया कि मरीज पर जहर का कोई प्रभाव नहीं है।
डॉ. सहारे ने बताया कि विस्तृत चिकित्सकीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मरीज की तबीयत जहर सेवन के कारण नहीं, बल्कि पूर्व में शराब सेवन बंद करने के कारण उत्पन्न विथड्रॉअल सिम्प्टम से बिगड़ी थी। मरीज के समुचित मानसिक एवं शारीरिक उपचार तथा विशेष देखभाल को ध्यान में रखते हुए उन्हें एम्स रायपुर रेफर किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा पूरे उपचार काल में मरीज की स्थिति पर सतत निगरानी रखते हुए आवश्यक सभी चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं।
इधर, 12 जनवरी 2026 को सुमेर सिंह द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटना को लेकर कुछ समाचार माध्यमों में इसे धान विक्रय में आ रही कथित परेशानियों से जोड़कर प्रकाशित किया गया था। इन समाचारों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्परता से जांच कराई। एसडीएम पाली रोहित सिंह ने बताया कि सुमेर सिंह के नाम पर ग्राम पूटा में खसरा नंबर 270/2 रकबा 0.202 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 219/2 रकबा 1.315 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। उक्त भूमि का मौके पर निरीक्षण अपर कलेक्टर कोरबा (प्रभारी भू-अभिलेख शाखा), डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, हल्का पटवारी, भूमि विक्रेता, ग्राम सरपंच, उप-सरपंच एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में किया गया।
मौके पर तैयार पंचनामा एवं लिए गए फोटोग्राफ्स से यह स्पष्ट हुआ कि खरीफ मौसम 2026 में उक्त भूमि पर धान अथवा अन्य किसी भी प्रकार की फसल नहीं लगी थी, जिसकी पुष्टि मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भी की। प्रशासनिक जांच में यह निष्कर्ष सामने आया कि आत्महत्या के प्रयास को धान विक्रय से जोड़कर प्रकाशित किए गए समाचार तथ्यात्मक रूप से भ्रामक एवं निराधार हैं। जांच में ऐसे किसी भी दावे का कोई आधार नहीं पाया गया है।