बीसीए की डिग्री छोड़ी, तंदूरी समोसे से बनाई अपनी पहचान, मनेश्वर बने युवाओं के प्रेरणा स्रोत

कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी कहा था कि पकौड़ा तलना भी एक तरह का रोजगार है। इस कथन को साकार कर दिखाया है कोरबा के युवा मनेश्वर ने, जिन्होंने बीसीए की प्रोफेशनल डिग्री लेने के बाद भी नौकरी के बजाय तंदूरी समोसा बेचने को ही अपना कैरियर बना लिया। आज उनका ठेला बीसीए तंदूरी समोसा वाला के नाम से कोरबा की चौपाटी पर चर्चित ब्रांड बन चुका है।

मनेश्वर का यह अनोखा नाम ही लोगों को आकर्षित करता है। कई लोग तो सिर्फ ठेले का नाम पढ़कर ही उनके समोसे का स्वाद लेने पहुंच जाते हैं। तंदूरी में तैयार किए गए इन समोसों का स्वाद सामान्य समोसे से अलग और ज्यादा कुरकुरा होता है, जिसकी वजह से एक बार स्वाद लेने वाले लोग बार-बार लौटकर आते हैं। मूल रूप से जांजगीर जिले के निवासी मनेश्वर ने कुछ वर्षों तक दुर्ग और रायपुर में नौकरी की, लेकिन नौकरी की असंतोषजनक आय और समय की कमी के कारण उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू करने का निश्चय किया। मार्केट रिसर्च के बाद उन्होंने वर्ष 2018 में चौपाटी क्षेत्र में तंदूरी समोसा की रेड़ी लगाई। शुरुआत में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन मेहनत और लगन से अब उन्होंने अपने व्यवसाय को स्थायी रूप से स्थापित कर लिया है। आज मनेश्वर दो से तीन युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं और उन्हें चार अंकों की सैलरी प्रदान करते हैं।
0 दिन में 12 से 14 घंटे की मेहनत
मनेश्वर कहते हैं कि वे अपने काम को पूजा मानते हैं। रोज़ाना 12 से 14 घंटे मेहनत करते हैं ताकि ग्राहकों को बेहतरीन स्वाद मिल सके। उनका कहना है की कोई काम छोटा नहीं होता। अगर नौकरी में संतोष न मिले तो खुद का व्यवसाय जरूर शुरू करना चाहिए। जितनी मेहनत हम दूसरों के लिए करते हैं, उतनी मेहनत खुद के लिए करें तो सफलता निश्चित मिलती है।
0 प्रेरणा बन रहे हैं युवा उद्यमी
आज बीसीए तंदूरी समोसा वाला सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की मिसाल बन गया है। मनेश्वर का यह सफर युवाओं के लिए प्रेरणा है कि डिग्री ही नहीं, सोच और साहस भी सफलता की कुंजी है।