भाजपा कार्यालय भूमिपूजन से पहले निमंत्रण कार्ड और विज्ञापन बने विवाद की वजह
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी के नए जिला कार्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम से पहले ही पार्टी के भीतर असहजता और असंतोष के संकेत सामने आने लगे हैं। कार्यक्रम को लेकर जारी किए गए निमंत्रण कार्ड और अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन इन दिनों भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

दरअसल, भूमिपूजन कार्यक्रम के लिए दो अलग-अलग प्रकार के निमंत्रण कार्ड सामने आए हैं। एक कार्ड में जहां कुछ प्रमुख नेताओं के नाम दर्ज हैं, वहीं दूसरे कार्ड में उन्हीं नामों को हटाकर नए नाम शामिल किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, निमंत्रण पत्र पहले ही छप चुका था, लेकिन बाद में कुछ विशिष्ट अतिथियों के नाम जोड़ने के उद्देश्य से कोरबा के वरिष्ठ और पदस्थ नेताओं के नाम हटाए गए, जिसके बाद नया कार्ड जारी किया गया।
दोनों प्रकार के निमंत्रण कार्ड अब व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से वायरल हो रहे हैं। इससे कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है और नाराजगी भी देखी जा रही है। हालांकि दोनों कार्डों में कार्यक्रम की तिथि और स्थान समान हैं, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कौन-सा निमंत्रण कार्ड आधिकारिक माना जाए।

विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। अब कार्यक्रम को लेकर अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। विज्ञापन में जिला भाजपा अध्यक्ष और मंत्री जी की तस्वीरों को समान आकार और समान महत्व के साथ प्रकाशित किया गया है। इसे लेकर पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह संगठनात्मक संतुलन है या फिर किसी स्तर पर शक्ति प्रदर्शन की झलक।

पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं और सूत्रों का कहना है कि विज्ञापन का प्रारंभिक प्रारूप पहले से तैयार था, जिसमें जिला अध्यक्ष की तस्वीर अपेक्षाकृत छोटी रखी गई थी। बाद में भाजपा के मीडिया प्रभारी द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद विज्ञापन में संशोधन किया गया और जिला अध्यक्ष की तस्वीर मंत्री जी के बराबर आकार में रखकर विज्ञापन जारी किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा के आंतरिक समन्वय, संवाद और संगठनात्मक तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पार्टी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन भूमिपूजन कार्यक्रम से पहले उठा यह विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति को किस तरह संभालता है और क्या यह विवाद कार्यक्रम के दौरान शांत हो पाता है या फिर आगे और तूल पकड़ता है।