March 22, 2026

शहर में चल रहा कबाड़ का अजीबोगरीब धंधा

न्यूज एक्शन। शहर में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो कि फायनेंस में वाहन तो उठा लेता है लेकिन रकम जब अधिक हो जाती है या वाहन काम के लायक नहीं रह जाते है और फायनेस की रकम नहीं पटती है तो उसे गैराज के माध्यम से कबाड़ में बेच दिया जाता है। बताया जाता है कि वाहन का पुर्जा-पुर्जा काटकर अलग-अलग हिस्सों में कबाड़ के रूप में बेच दिया जाता है। इतना ही नहीं इसके पहले बकायदा संबंधित थाना क्षेत्र में वाहन चोरी की रिपोर्ट भी वाहन मालिक द्वारा लिखाई जाती है ताकि किसी तरह का कानूनी पचड़े से बचने का साधन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। बताया जाता है कि परिवहन विभाग का टैक्स भी अधिक होने की स्थिति में यह कार्य किया जाता है। यह गोरख धंधा एक लंबे अरसे से चलाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पूरा कारोबार राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है और इन्हें नेताओं द्वारा परोक्ष रूप से समर्थन दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई करना चाहती है, लेकिन कार्रवाई में राजनीतिक संरक्षण आड़े आ रहा है।
आमतौर पर भारी वाहन खरीदने के लिए खरीददार द्वारा फायनेंस कंपनी से संपर्क किया जाता है और एक निश्चित रकम जमा करने के बाद 10 चक्का, ट्रेलर, डाला बॉडी आदि वाहनों की खरीदी की जाती है। फायनेस कंपनी द्वारा सक्षम स्थिति का हवाला देकर इन्हें फायनेस भी कर दिया जाता है। बताया जाता है कि फायनेस में वाहन लेने के बाद वाहन मालिको द्वारा 2-4 किस्त तो समय पर पटाई जाती है लेकिन जैसे जैसे फायनेस की रकम बढ़ते जाती है, परिवहन विभाग का टैक्स भी बढऩे लगता है और वाहन भी जवाब देने लगते है तो वाहन मालिक इसका सबसे बड़ा तरीका ढूंढ निकालने में कामयाब हो गए है। बताया जाता है कि टी.पी.नगर इंडियन कॉफी हाउस के पास और डीडीएम रोड में गैरॉज व दुकान चलाने वाले संचालक से मिली भगत कर वाहन का पूरा हुलिया ही टुकड़ों में बांट दिया जाता है। इंजन से लेकर बॉडी और चक्का अलग-अलग बेच दिया जाता है जिसके बाद उसका कोई सबूत ही नहीं बचता है। बताया जाता है कि इससे बचने के लिए सबसे आसान तरीका वाहन मालिकों द्वारा यह अपनाया जाता है कि वाहन की चोरी की रिपोर्ट संबंधित थाना या चौकी में लिखा दी जाती है। चूंकि वाहन फायनेस करने के समय फायनेस कंपनी वाहन को ही गिरवी रखती है उस स्थिति में जब वाहन ही नहीं है तो उसे जप्त करने का सवाल ही नहीं उठता। आमतौर पर चोरी की रिपोर्ट लिखाने के बाद वाहन मालिक इससे कानूनी तौर पर बच जाता है। इतना ही नहीं परिवहन विभाग का भारी भरकम टैक्स भी पटाने से बच जाता है। वहीं गैरेज संचालक द्वारा वाहनों को टुकड़ों में काटकर बेचा जाता है जिससे कि वाहन का पता ही नहीं लगता है कि कौन सा वाहन है। यह कार्य लंबे अरसे से किया जा रहा है। इतना ही नहीं गैरॉज के कबाड़ के नाम पर फर्जी रसीद भी तैयार की जाती है और उसे कबाड़ खरीदने वालों को दे दिया जाता है। बताया जाता है कि यह कारोबार राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है। लोगों में इस बात की चर्चा जमकर है कि रसूखदार नेताओं द्वारा कबाड़ व्यवसाय से जुड़े लोगों को अभयदान दिया गया है। जिसके कारण उनके कारोबार में किसी प्रकार का अंकुश नहीं लग रहा है। बताया जाता है कि गैरॉज संचालक द्वारा डंके की चोट पर कहा जाता है कि इस धंधे के लिए उसके द्वारा 15-20 लाख रूपए प्रतिमाह दिया जाता है लेकिन किसे दिया जाता है यह नहीं बताया जाता है । कबाड़ को खपाने में सक्रिय व्यक्ति तो यह भी दावा करता है कि मेरा कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। बताया जाता है हाल में उसके द्वारा जमकर यह कार्य किया गया है और गैरॉज के कबाड़ के नाम पर वाहनों को काट कर बेचा गया है। बताया जाता है कि उक्त दुकान संचालक के पास अभी भी लगभग 100 टन चेचिस का कबाड़ स्टॉक में है। उसके द्वारा इंजन, गियर, चक्का आदि पहले ही बेच दिया गया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि वाहन को टुकड़ों में काटकर बेचने का गोरखधंधा जोर शोर से शहर में चल रहा है।

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Ranjan Prasad

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