March 22, 2026

मलगांव को बिना पुनर्वास के दोबारा विस्थापित किए जाने का विरोध

कोरबा 1 जून। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने मलगांव को बिना किसी पुनर्वास योजना के दोबारा विस्थापित किए जाने की एसईसीएल की योजना का विरोध किया है। इसके साथ ही ग्रामीणों को संगठित कर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के कोरबा जिला अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, सचिव प्रशांत झा व सहसचिव दीपक साहू ने कहा कि 1980-85 में पहली बार मलगांव को बिना किसी पुनर्वास व्यवस्था के उजाड़ा गया था। पुनर्वास न मिलने के कारण यहां के ग्रामीण बस्ती से थोड़ी दूरी पर ही बस गए थे। इस बसाहट का भी ग्रामीणों के विरोध के बावजूद 2004 में अधिग्रहण कर लिया गया और अब इसे हटाने पर जोर दिया जा रहा हैए जबकि बुनियादी सुविधाओं सहित पुनर्वास के नाम पर एसईसीएल चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होने बिना ठोस पुनर्वास योजना के मलगांव के विस्थापन को अवैध करार दिया है। अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने बताया कि बिना मूलभूत सुविधा के अमगांव, भठोरा, भिलाई बाजार, रलिया, बाहनपाठ, पोड़ी, नरइबोध आदि गांवों को हटाने की तैयारी का भी किसान सभा विरोध करती है। जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि पूर्व में पुर्नवास के तहत गंगानगर, विजयनगर, नेहरूनगर, बेलटिकरी,सिरकी, चैनपुर, वैशाली नगर में विस्थापितों को पुर्नवास के तहत बसावट दी गई, पर वहां आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे है और अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कई विस्थापित नौकरी और मुआवजा के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। किसान सभा के नेता दीपक साहू ने कहा की मलगांव में भी अभी तक भूमि अधिग्रहण की शर्तों का एसईसीएल प्रबंधन ने पालन नहीं किया है और न ही वर्तमान कानूनों के अनुसार इस अधिग्रहण का मुआवजा स्वीकृत किया गया है।

उन्होंने मांग की है कि मलगांव के 160 परिवारों को विस्थापित करने से पहले एसईसीएल गैर-विवादास्पद भूमि पर सड़क, सफाई, प्रकाश, पेयजल व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास कर ग्रामीणों का पुनर्वास करे, हर परिवार को आवासीय भूमि का स्वामित्व दें तथा घर बनाने के लिए अनुदान दें, अधिग्रहित भूमि के एवज में प्रत्येक परिवार के सदस्यों को स्थायी नौकरी दें। वर्तमान दर से चार गुना मुआवजा दे और इसके बिना किसी भी प्रकार के विस्थापन के खिलाफ किसान सभा सभी के बैनर तले संगठित होकर ग्रामीण जन आंदोलन करेंगे। किसान सभा के प्रतिनिधि मंडल ने प्रभावित ग्रामों का दौरा किया।

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Ranjan Prasad

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