February 25, 2026

कोरबा 31 अगस्त। प्रथम पूज्य भगवान गणेश का उत्सव आज से प्रारंभ हो गया है। उनकी प्रतिमाओं की स्थापना सुबह से हो रही है। यह सिलसिला रात्रि तक जारी रहेगा। उत्सव की शुरूआत से नगर के साथ-साथ सभी क्षेत्रों में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। गजानन, गौरी पुत्र, लंबोदर, विघ्नविनाशक सहित अनेक नामों से भगवान गणपती की पूजा अर्चना की जाती है। देवताओं में वे सबसे पहले पूजे जाते है।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष में चतुर्थी से अनंनत चतुर्दशी तक उनका उत्सव धूमधाम से मनाने की पंरपरा है। मिट्टी से बनी उनकी प्रतिमाओं की स्थापना लोगों के द्वारा घरों से लेकर संस्थान और पण्डालों में करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है। चतुर्थी से यह दौर प्रारंभ हो गया। पिछले दो वर्ष कोरोना की समस्या के कारण गणेश उत्सव को औपचारिक रूप से बनाया गया। स्थितियां सामान्य होने पर अब यह उत्सव काफी धुमधाम से मनाया जा रहा है। जिला मुख्यालय कोरबा के अलावा उपनगरीय क्षेत्र, कस्बो और अंचल में हजारों संख्या में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होगी और समापन से पहले हवन-पूजन किया जायेगा। मिट्टी की प्रतिमाओं का महत्व शास्त्रों में मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को विशेष अवसर पर पूजित करने का विधान है। इसलिए कोरबा जिले में हिंदू समाज इसी पर ज्यादा जोर दे रहा है। पर्यावरण के हिसाब से ऐसी प्रतिमाएं बेहतर होती और पानी में जल्दी घुल जाती है। हालांकि कई मूर्तिकारों ने व्यवसायिक कारणों से प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमाएं उतारी है। लेकिन इन्हें भाव नहीं मिल रहा है।

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Ranjan Prasad

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