शहर में उपेक्षित महापुरुषों की प्रतिमाएं, उजाले को तरस रही

कोरबा। देश की आजादी और निर्माण में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले महापुरुषों की प्रतिमाएं आज उपेक्षा की शिकार होती दिखाई दे रही हैं। शहर के कई चौक-चौराहों पर स्थापित इन प्रतिमाओं के आसपास न रोशनी की व्यवस्था है और न ही नियमित देखरेख। स्थिति यह है कि जिन महापुरुषों के योगदान से देश आज भी संचालित हो रहा है, उनकी प्रतिमाएं ज्यादातर समय अंधेरे में डूबी रहती हैं। यह प्रतिमाएं केवल जयंती और पुण्यतिथि पर ही याद की जाती हैं, बाकी दिनों में इन्हें भुला दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर महापुरुषों की प्रतिमाएं रंगीन रोशनी से सुसज्जित हैं, जबकि कई जगहों पर पूरी तरह अंधेरा पसरा रहता है, जो स्पष्ट भेदभाव व अनदेखी को दर्शाता है। नगरवासियों ने मांग की है कि सभी महापुरुषों की प्रतिमाओं का सम्मान समान रूप से किया जाए और रोशनी व सफाई की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी विरासत गौरव के साथ जीवित रह सके।