February 4, 2026

बीएमएस ने सराहा, मोर्चा खोलने की तैयारी में अन्य श्रमिक संगठन


देश में चार नए श्रम संहिता लागू, श्रमिक हित पर बहस तेज
0 26 नवंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध का ऐलान
कोरबा। केंद्र सरकार ने देश के श्रम क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए 29 पुराने श्रम कानूनों को निरस्त कर उनकी जगह चार नई श्रम संहिताओं को लागू कर दिया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इन संहिताओं को औपचारिक रूप से नोटिफाई करने की जानकारी दी। सरकार का दावा है कि यह निर्णय श्रम सुधार की दिशा में बड़ी पहल है, जिससे संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्रों के श्रमिकों को लाभ मिलेगा। लागू की गई चार संहिताओं में कोड ऑन वेजेज, 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 की गई है, सरकार का कहना है कि इन संहिताओं से श्रम व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनेगी। वहीं भारतीय मजदूर संघ ने इसे श्रमिकों के हित में बड़ा कदम बताया है।
0 ट्रेड यूनियनों ने किया विरोध का ऐलान
वहीं दूसरी तरफ सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच इन नए श्रम कोडों का कड़ा विरोध कर रहा है। यूनियनों ने आरोप लगाया है कि ये संहिताएँ आने वाली पीढ़ियों के रोजगार और अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालेंगी। संयुक्त मंच ने 26 नवंबर को राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध एवं विरोध कार्रवाई की घोषणा की है। विरोध के तौर पर कार्यस्थलों पर काले बैज लगाए जाएंगे, गेट मीटिंग, स्ट्रीट कॉर्नर मीटिंग और जागरूकता रैलियां होंगी तथा श्रम कोड को पूरी तरह वापस लेने की मांग की जाएगी, ट्रेड यूनियंस का कहना है कि नए लेबर कोड श्रमिक-विरोधी और उद्योग पक्षीय हैं तथा बेरोजगारी और महंगाई के दौर में श्रमिकों पर अतिरिक्त बोझ डालेंगे। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय उद्योग प्रमुख ने कहा कि चारों नई श्रम संहिताएं देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक कदम हैं। उनके अनुसार नई संहिताओं से सभी श्रमिकों को समय पर न्यूनतम वेतन की गारंटी, नियुक्ति पत्र का अनिवार्य प्रावधान, महिलाओं को समान वेतन, समान सम्मान, 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को एक वर्ष बाद ग्रेच्युटी, 40 वर्ष से ऊपर के श्रमिकों को वार्षिक फ्री हेल्थ चेक-अप, ओवरटाइम पर दोगुना वेतन जोखिम वाले क्षेत्रों में कामगारों को शत-प्रतिशत हेल्थ सिक्योरिटी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार न्याय व सुरक्षा यह बदलाव सिर्फ सुधार नहीं, बल्कि श्रमिक कल्याण के लिए निर्णायक कदम है, जो “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को मजबूत करेगा।

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Ranjan Prasad

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