कोयला उत्पादन में देसी मशीनरी व उपकरणों का होगा इस्तेमाल

0 अगले 6 साल में विदेशों से आयात को समाप्त करने की योजना
कोरबा।
कोयला खदानों में इस्तेमाल भारी मशीनरी व उपकरणों की खरीदी में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने कोल इंडिया ने प्लान बनाया है। अगले 6 साल में विदेशों से आयात को समाप्त करने की योजना पर काम होगा। साथ ही घरेलू स्तर पर निर्मित उपकरणों को प्रोत्साहित और विकसित किया जाएगा। वर्तमान में कोल इंडिया ने भारी मशीनरी के आयात में 3500 करोड़ रुपये खर्च किया है और सीमा शुल्क में एक हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होता है। चूंकि निकट भविष्य में भी कोयला ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत बना रहेगा, ऐसे में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
खुली व भूमिगत खदानों में इलेक्ट्रिक रोप शॉवेल्स, हाइड्रोलिक शॉवेल्स, डंपर, क्रॉलर डोजर, ड्रिल, मोटर ग्रेडर व फ्रंट एंड लोडर व्हील डोजर उच्च क्षमता के खनन उपकरण का इस्तेमाल होता है। इसके घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने कोल इंडिया के निदेशक (तकनीकी) की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति में उद्योग मंत्रालय, रेल मंत्रालय, एससीसीएल, एनएलसीआईएल, एनटीपीसी, डब्ल्यूबीपीडीसीएल, बीईएमएल, कैटरपिलर, टाटा हिताची, गेनवेल उद्योग संघ समेत विभिन्न हितधारक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। यह अनुमान भी लगाया है कि कोयला साल 2030 के बाद भी प्रमुख ऊर्जा स्त्रोत के रूप में बना रहेगा। इसे ध्यान में रखते हुए समिति ने तकनीकी मानकों का विकास करना और उस पर सहमति देने संबंधी सिफारिश की है। यह प्रयास मेक इन इंडिया के प्रयास को बढ़ावा देने के साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पहल माना जा रहा है। समिति ने अगले 10 वर्ष में खुली व भूमिगत खदान दोनों के लिए माइनिंग इक्विपमेंट्स की भारी आवश्यकता की भी उम्मीद जताई है और इसकी अंतिम रिपोर्ट भी पेश की है।

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