नए रैक और वैगन से होगी कोयला ढुलाई, बार-बार फाटक बंद होने का मिलेगा छुटकारा

0 अभी छह बार फाटक होता है बंद, नए रैक से सिर्फ चार बार
कोरबा।
30 साल पुराने वैगन को डीएसपीएम प्रबंधन द्वारा बदलने की तैयारी है। अभी 12 वैगन से कोयला संयंत्र तक पहुंच रहा है, इसे बढ़ाकर 26 वैगन करने की तैयारी है। अभी हर रैक से 600-700 टन कोयला पहुंचता है। यह बढ़कर 1200 टन प्रति रैक तक हो जाएगा। नए रैक और वैगन बढ़ाने का फायदा आम लोगों को भी मिल सकता है। दरअसल कम वैगन होने से तीन बार और पीक सीजन में चार रैक कोयला पहुंचता है। वैगनों की क्षमता बढ़ने के बाद कम रैक की जरूरत पड़ेगी। इससे सीएसईबी फाटक छह की बजाय चार बार ही बंद होगा।
बंद होने से पहले तक कोरबा ताप विद्युत गृह से कोयले की आपूर्ति मानिकपुर खदान से कंपनी के खुद के वैगन सिस्टम से होती रही है। इस संयंत्र के बंद होने से पहले 2007-08 में डीएसपीएम संयंत्र उत्पादन में आया। इसके बाद रेलवे स्टेशन के रेलवे एक्सचेंज यार्ड से डीएसपीएम संयंत्र तक कोयला की सप्लाई होती रही है। डीएसपीएम के नए वैगन के अलावा केटीपीएस के पुराने वैगन से कोयले पहुंचता है। उत्पादन कंपनी ने अब पुराने वैगन को बदलने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के मुताबिक 24 से 26 वैगन के रैक खरीदे जाएंगे। प्रति रैक 1200 टन तक कोयला संयंत्र पहुंच सकेगा। रेलवे ने उत्पादन कंपनी को सचेत किया था कि रेलवे लाइन में दबाव बढ़ रहा है। इसे देखते हुए रेलवे लाइन को पहले से बेहतर किया गया है, ताकि पीक सीजन में जब कोयले के लिए औसत से अधिक रैक चलते हैं तो दिक्कतें आ सकती थी। इसके अलावा वैक्यूम ब्रेक को हटाकर एयर ब्रेक लगाए जाएंगे। उत्पादन कंपनी ने वैगन को बदलने के अलावा रैक के रिनोवेशन का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद उत्पादन कंपनी आगे की प्रक्रिया को शुरु करेगी।

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