February 4, 2026

भू-विस्थापित किसानों के 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आज से एसईसीएल सीएमडी ऑफिस का महाघेराव


कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने एसईसीएल की कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और कोरबा खदानों से प्रभावित भू-विस्थापित किसानों के लंबित रोजगार प्रकरणों के समाधान को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। संगठनों ने 20 नवंबर आज से एसईसीएल सीएमडी कार्यालय, बिलासपुर के सामने उग्र प्रदर्शन और महाघेराव करने का ऐलान किया है। आंदोलन के केंद्र में अर्जन के बाद जन्मे बच्चों को रोजगार, छोटे खातेदारों को रोजगार, बसावट जरहाजेल की जमीन किसानों को वापस करने, तथा आउटसोर्सिंग कार्यों में 100 प्रतिशत रोजगार देने सहित 11 सूत्रीय मांगें शामिल हैं। प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए गांव–गांव में बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें ग्रामीणों का ठोस समर्थन मिल रहा है। किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि विस्थापित परिवार वर्षों से रोजगार के लिए भटक रहे हैं। विकास के नाम पर अपनी जमीन व गांव से बेदखल किए गए परिवारों की स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है। अर्जन के बाद जन्मे युवाओं और छोटे खातेदारों को रोजगार से वंचित रखकर हजारों प्रभावितों को खेती–किसानी से अलग कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की जमीन लेकर उनके जीवन का स्थायी आधार छीन लिया है, इसलिए जमीन के बदले सभी खातेदारों को स्थायी रोजगार देना ही होगा। किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर और दीपक साहू ने आरोप लगाया कि एसईसीएल पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों पर गंभीर नहीं है और किसानों को छोटे–बड़े खातेदार के नाम पर बांटकर उनकी एकता तोड़ने की कोशिश की जा रही है। भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम, रेशम यादव, सुमेन्द्र सिंह कंवर ठकराल, रघु यादव ने कहा कि भू-विस्थापितों को बिना किसी शर्त के जमीन के बदले रोजगार मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अपने अधिकारों के लिए वे अंतिम सांस तक संघर्ष करने को तैयार हैं। संगठन से जुड़े किसानों का कहना है कि सरकार को विस्थापितों को ऐसा जीवन देना चाहिए जिससे उन्हें अपनी जमीन खोने का दर्द महसूस न हो, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में गरीबों को संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

ranjan photo
Ranjan Prasad

Spread the word