February 4, 2026

एनटीपीसी कोरबा में ‘धरोहर’ शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य संध्या, अन्नपूर्णा देवी को भावभीनी श्रद्धांजलि


कोरबा।
एनटीपीसी कोरबा ने 24 जनवरी की संध्या को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य परंपरा को समर्पित भव्य सांस्कृतिक आयोजन “धरोहर” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम महान संगीत मनीषी अन्नपूर्णा देवी की अमर विरासत को समर्पित रहा। एनटीपीसी कोरबा टाउनशिप स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित इस संध्या ने श्रोताओं को सुर, लय और भाव की दिव्य अनुभूति कराई।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिभास घटक एवं सुभ्रा घटक अध्यक्ष, मैत्री महिला समिति सहित एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। बसंत पंचमी की आध्यात्मिक भावना से ओत-प्रोत इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित शास्त्रीय कलाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियाँ दीं।
सितार वादन में पं. देबप्रसाद चक्रवर्ती, बांसुरी पर पं. सुदीप चट्टोपाध्याय, तबले पर रूपक मित्र, हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में किशन कुमार देवांगन तथा कथक नृत्य में कल्पना साहू ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रत्येक प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय परंपरा की गहराई और गरिमा स्पष्ट रूप से झलकी।


कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सभी कलाकारों की संयुक्त जुगलबंदी प्रस्तुति रही, जिसमें सुर, ताल और भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। समापन अवसर पर सभी कलाकारों को पारंपरिक डोकरा शिल्प स्मृति-चिह्न एवं कोसा शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
“धरोहर” के माध्यम से एनटीपीसी कोरबा ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से प्रदर्शित किया। यह संध्या केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परंपरा, साधना और कलात्मक उत्कृष्टता का स्मरणीय उत्सव रही।

कलाकार परिचय
0 किशन कुमार देवांगन
राजिम (छत्तीसगढ़) के युवा एवं प्रतिभाशाली हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक किशन कुमार देवांगन ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से पं. सतीश लक्ष्मण राव इंदुरकर ग्वालियर घराना के सान्निध्य में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वर्तमान में वे पं. कैवल्य कुमार गुरव के शिष्य एवं डॉ. गंगूबाई हंगल गुरुकुल, कर्नाटक के छात्रवृत्ति प्राप्त विद्यार्थी हैं। उनकी गायकी में किराना घराने की मधुरता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति स्पष्ट झलकती है।
0 कल्पना साहू
दूरदर्शन केंद्र, रायपुर की बी-ग्रेड कथक कलाकार कल्पना साहू ने डॉ. गुंजन तिवारी से कथक नृत्य का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर चुकी कल्पना साहू खजुराहो महोत्सव सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दे चुकी हैं।
0 पं. देबप्रसाद चक्रवर्ती
देश के अग्रणी सितार वादकों में शुमार पं. देबप्रसाद चक्रवर्ती को सेनिया–मैहर घराने में पं. अजय सिन्हा राय तथा विष्णुपुर घराने के पं. गोकुल नाग से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। उनकी वादन शैली ध्रुपद-प्रधान, गहन और गंभीर संगीतात्मकता से युक्त मानी जाती है।
0 पं. सुदीप चट्टोपाध्याय
पन्नालाल घोष परंपरा के सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. सुदीप चट्टोपाध्याय आकाशवाणी, कोलकाता के टॉप-ग्रेड कलाकार हैं। वर्ष 1992 से वे पश्चिम बंगाल के एकमात्र आईसीसीआर मान्यता प्राप्त बांसुरी वादक के रूप में देश-विदेश में भारतीय संगीत परंपरा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
0 रूपक मित्र
प्रतिष्ठित तबला वादक रूपक मित्र ने प्रारंभिक प्रशिक्षण फ़र्रुख़ाबाद घराने के श्री सजल कर्मकार से तथा उच्च प्रशिक्षण बनारस घराने के पं. समर साहा से प्राप्त किया है। वे रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एम.फिल. उपाधि प्राप्त कर चुके हैं तथा आकाशवाणी, कोलकाता के बी-ग्रेड कलाकार हैं।

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Ranjan Prasad

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