भाजपा संगठन में बढ़ी हलचल, पोस्ट-नियुक्ति और पदों को लेकर अंदरूनी खींचतान की चर्चा

कोरबा। भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय संगठन में इन दिनों अंदरूनी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पोस्ट, हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों और कुछ पुराने नेताओं को जिम्मेदारी नहीं मिलने को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कार्यकर्ताओं के बीच भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष की सुगबुगाहट महसूस की जा रही है।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी चर्चा

पुर्व जिला महामंत्री संतोष देवांगन और व्यापार प्रकोष्ठ से जुड़े टेकचंद अग्रवाल के हालिया फेसबुक पोस्ट के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। संतोष देवांगन लंबे समय तक संगठन में महत्वपूर्ण पद पर रहे, लेकिन वर्तमान में उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। उनके पोस्ट में दूरी बनाने और मानसिक शांति जैसी बातों का उल्लेख होने के बाद इसे राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं टेकचंद अग्रवाल का नाम भी चर्चा में है, क्योंकि संगठन के कठिन समय में वे सक्रिय माने जाते रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं थी, उस समय कटघोरा क्षेत्र के कई कार्यक्रम उनके निवास पर आयोजित होते थे। कार्यकर्ताओं के लिए भोजन-नाश्ते की व्यवस्था सहित कई जिम्मेदारियां उन्होंने निभाईं है। इसी बीच विकास महतो, संजय भावनानी, आकाश सक्सेना, किरण मरकाम और आलोक सिंह को भी अब तक कोई पद नहीं मिलने की चर्चा कार्यकर्ताओं के बीच चल रही है।

नियुक्तियों को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी
हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद कुछ कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। महिला मोर्चा में जिला स्तर की नियुक्ति के बाद यह बात सामने आ रही है कि लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा रही है। हालांकि इस विषय पर संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने में असंतोष की चर्चा लगातार चल रही है।
भाजयुमो मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति पर उठे सवाल
युवा मोर्चा की कार्यकारिणी बनने के बाद कटघोरा मंडल अध्यक्ष के रूप में अनुराग दुहलानी की नियुक्ति भी विवाद का कारण बन गई है। कार्यकर्ताओं द्वारा उनकी उम्र सीमा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जन्मतिथि के आधार पर उनकी उम्र निर्धारित सीमा से अधिक बताई जा रही है। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले मंडल चुनाव के समय उम्र नियम का सख्ती से पालन किया गया था, लेकिन इस बार उसे नजरअंदाज किया गया।
इस विषय को लेकर कई समाचार सोशल मीडिया में भी प्रकाशित हुए लेकिन संगठन ने कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।
नेतृत्व के फैसले का इंतजार
लगातार उठ रहे सवालों और चर्चाओं के बीच अब तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अंदरूनी स्तर पर चल रही हलचल के बीच कार्यकर्ताओं की नजर अब जिला और प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हुई है कि इन चर्चाओं और नाराजगी के बीच आगे क्या निर्णय लिया जाता है।