February 4, 2026

तिहाड जेल के 3500 कैदी लापता, दिल्ली पुलिस को पत्र

■ इमरजेंसी पैरोल पर छूटे कैदियों ने सरेंडर नही किया

नई दिल्ली 17 अप्रैल: तिहाड़ जेल के करीब 3500 कैदी लापता हैं, बड़ी संख्या में कैदियों के जेल में सरेंडर न करने के मामले को तिहाड़ जेल प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. इसके लिए तिहाड़ जेल की ओर से दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर तमाम कैदियों की विस्तृत जानकारी साझा की हैं.

दरअसल तिहाड़ के जिन करीब 6700 कैदियों को पिछले साल कोरोना से बचाने के लिए जेल से इमरजेंसी परोल और जमानत पर छोड़ा गया था, उनमें से आधे से अधिक तकरीबन 3500 कैदी भाग गए। इन तमाम कैदियों की इमरजेंसी परोल 10 अप्रैल तक खत्म हो गई। इस दिन तक इन सभी को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर देना चाहिए था। लेकिन इनमें से 3500 से अधिक कैदी जेल में आत्मसमर्पण करने के इस अंतिम दिन तक तक नहीं पहुंचे।

बड़ी संख्या में कैदियों के जेल में सरेंडर न करने के मामले को तिहाड़ जेल प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। इसके लिए तिहाड़ जेल की ओर से दिल्ली पुलिस को लेटर लिखकर तमाम फरार कैदियों की डिटेल साझा की है, ताकि आने वाले समय में दिल्ली पुलिस इन फरार कैदियों को गिरफ्तार कर जेल में वापस लाने की मैराथन कवायद शुरू कर सके।

सूत्रों ने बताया कि इमरजेंसी परोल पर छोड़े गए करीब 6700 कैदियों में से 1184 सजायाफ्ता कैदी हैं। बाकी सभी विचारा धीन कैदी हैं। फरार होने वाले कैदियों में सबसे अधिक संख्या भी इन्हीं विचाराधीन कैदियों की है जिन्हें पिछले साल संबंधित कोर्ट द्वारा इमरजेंसी जमानत पर छोड़ा गया था। इसके लिए हाई पावर कमिटी भी गठित की गई थी, जिसकी सलाह पर भी कैदियों को कोरोना से बचाने के लिए यह कदम उठाए गए थे।

इन तमाम कैदियों की इमरजेंसी परोल आगे नहीं बढ़ाई गई। सभी को इनकी इमरजेंसी परोल खत्म होने के दिन के हिसाब से हर सूरत में 10 अप्रैल तक जेल में सरेंडर करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन करीब 3500 हजार कैदियों ने तय समय तक सरेंडर नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि इनमें से कुछ मामलों में सजा खत्म हो गई हो, लेकिन किसी अन्य इमरजेंसी कारण के इनमें से कुछ जेल में सरेंडर नहीं कर पाए हों या फिर संबंधित अदालतों में इनमें से कुछ ने अपनी इमरजेंसी जमानत बढ़ाने की अर्जी दाखिल की हो। जेल अधिकारियों का हालांकि कहना है कि इन तमाम हालात में भी इन कैदियों को अपनी परोल खत्म होने के अंतिम दिन जेल में सरेंडर करना चाहिए था.

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Ranjan Prasad

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