March 17, 2026

22 दिसम्बर, बुधवार की प्रभात बताएगी कि हमारे आने वाले छह माह कैसे बीतेंगे ? जानें कैसे पता चलेगा…..?

सूर्य आज 21 दिसम्बर 2021, मंगलवार रात्रि को सायन मकर राशि में प्रवेश कर चुका है। इसके साथ ही उत्तरायण का आरंभ हो चुका है। इसलिए 22 दिसम्बर 2021, बुधवार को सूर्योदय उत्तरायण का सूर्य होगा।
दिनांक 22 दिसम्बर 2021 को आप यह जान सकते हैं कि हमारा उत्तरायण काल(आने वाले छह माह) कैसा रहेगा।
इसके लिए यह ध्यान रखें कि 22 दिसम्बर, बुधवार को भोर में जब भी जगें उस समय अपनी नाक से निकलने वाले स्वर को देखें।
यदि हमारी नाक में दाँयी(राईट) ओर से साँस आ-जा रही है, इसका मतलब है कि आपके आने वाले छह माह स्वास्थ्य और अन्य दृष्टि से एकदम अच्छे होंगे।
उठते ही अपनी सांस देखें, दाँयी होने पर दाँयी हथेली से चुम्बन लें और दाँयी हथेली पूरे शरीर पर ऊपर से नीचे फिरा लें। इसके बाद अपना दाहिना पैर जमीन पर रखते हुए धरती माता को प्रणाम करते हुए बिस्तर त्याग दें और आगे बढ़ जाएं।
इससे आने वाले छह माह पूरी तरह मस्ती में गुजरेंगे तथा मौत भी हमारे पास नहीं फटक सकेगी। किसी कारण से 22 दिसम्बर की प्रभात में जगने के समय यदि हमारा स्वर दांया नहीं है और बांया चल रहा है, इसका सीधा सा अर्थ है कि आपके आने वाले छह माह बाधाओं से भरे रहेंगे। इस स्थिति में बिस्तर से नीचे नहीं उतरें तथा तब तक बांयी करवट सोते रहें जब तक कि हमारी सांस दांयी नहीं हो जाती। विपरीत करवट ले लिए जाने पर स्वर बदल जाता है।
स्वर को दांया करने के लिए अग्नि, सूर्य और धूप आदि का मन ही मन चिन्तन करें। सांस रोकते हुए अपने ईष्ट देव के मंत्र का जप करें। फिर भी स्वर न बदले तो बिस्तर पर खड़े होकर बांये हाथ में कोई भारी वस्तु उठा लें। इससे स्वर बदल कर दांया हो जाएगा। फिर दांयी सांस होते ही उपरोक्त क्रियाएं कर लें। इससे आने वाले छह माह में जो भी बाधाएं सामने आएंगी, उनका स्वतः समाधान होता चला जाएगा।
यानि की हम सभी के लिए 22 दिसम्बर 2021 की भोर आने वाले छह माह का संकेत देगी। यह ध्यान रखें कि यह सभी प्रयोग सात्विक लोगों के लिए ही है।
आज रात्रि में शयन के समय यदि अपना स्वर दांया (राईट) करके सोएं, तो कल सवेरे जागरण काल में स्वर को दांया रखने में सुविधा रहती है और सामान्यतः स्वर दांया ही रहता है।
यों भी रात्रि में शयन के समय रोजाना अपना स्वर दांया ही रखें। इससे अगले दिन प्रभात में जागरण के समय वही स्वर रहता है जो उस तिथि को होना चाहिए।
मूल बात यह है कि जिस समय अपने यहां सूर्योदय हो उस समय अपना स्वर दांया होना चाहिए। जो लोग सूर्योदय से काफी पहले जगते हैं उन्हें चाहिए कि वे भी सूर्योदय काल से कुछ समय पूर्व अपना स्वर दांया कर लें तथा प्रयास यह करें कि सूर्योदय से घण्टे भर तक स्वर दांया ही बना रहे।
ध्यान रखें कि यही प्रक्रिया यदि मकर संक्रान्ति के समय भी अपना ली जाए तो श्रेष्ठ होगा।

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Ranjan Prasad

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